What is RERA? | RERA Kya Hai in Hindi | RERA Act 2016 | Real Estate Regulatory Authority | Benefits of RERA Act, 2016

रेरा

जानें RERA के बारे में संपूर्ण जानकारी (हिंदी में)

रेरा (RERA) क्या है?

RERA (Real Estate Regulatory Authority) एक नियामक व्यवस्था (Regulatory Framework) है, जिसका उद्देश्य देश के रियल एस्टेट क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों की निगरानी करना तथा बिल्डर्स, प्रमोटर्स और रियल एस्टेट एजेंट्स की जवाब देही सुनिश्चित करना है। जिससे खरीदारों की शिकायतों का समाधान किया जा सके। इस कानून के लागू होने के बाद अधिकांश रियल एस्टेट परियोजनाओं(प्रोजेक्ट) और ब्रोकर का RERA में पंजीकरण (Registration) आवश्यक हो गया है, जिससे खरीदारों को परियोजना(प्रोजेक्ट) की वास्तविक जानकारी प्राप्त हो सके और समय पर कब्जा (Possession) एवं अन्य अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। यह देश के नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा और शिकायतों के समाधान का केंद्र बिंदु माना जाता है।  

यह भारत की संसद द्वारा पारित एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसका उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता (Transparency), जवाबदेही (Accountability) और खरीदारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

रेरा के लागू होने से घर, फ्लैट, प्लॉट, मकान और अन्य अचल संपत्तियों के खरीदारों को अधिक कानूनी सुरक्षा प्राप्त हुई है। साथ ही, बिल्डरों और डेवलपर्स के लिए भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं, जिससे धोखाधड़ी और अनियमितताओं पर रोक लगाने में सहायता मिलती है।

इस अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश में रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (Real Estate Regulatory Authority – RERA) की स्थापना का प्रावधान किया गया है। साथ ही, रियल एस्टेट से संबंधित विवादों के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण के लिए रियल एस्टेट अपीलीय अधिकरण (Real Estate Appellate Tribunal) की व्यवस्था भी की गई है।

यह विधेयक 10 मार्च 2016 को राज्यसभा तथा 15 मार्च 2016 को लोकसभा द्वारा पारित किया गया। रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 भारत में 1 मई 2016 से लागू हुआ। इस कानून का मुख्य उद्देश्य खरीदारों के अधिकारों की रक्षा करना, रियल एस्टेट उद्योग और उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करना है। इसके बाद 1 मई 2016 से अधिनियम के अधिकांश प्रावधान लागू किए गए, जबकि शेष प्रावधान 1 मई 2017 से प्रभावी हुए। अधिनियम के अनुसार, केंद्र एवं राज्य सरकारों को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक नियम (Rules) अधिसूचित करने का दायित्व सौंपा गया।

RERA और UP RERA के बीच संबंध

इसे सरल शब्दों में इस प्रकार समझा जा सकता है जोकि निम्नलिखित प्रकार से है —
RERA Act, 2016 पूरे भारत के लिए बनाया गया मूल केंद्रीय कानून है।
UP RERA उसी केंद्रीय कानून के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में  कार्य करने वाली नियामक अथॉरिटी है।
अर्थात कानून केंद्र सरकार बनाती है, जबकि उसे लागू करने का कार्य राज्य की RERA Authority करती है।

RERA (Central Law) एवं UP RERA (State Authority) में अंतर
विशेषताRERA (केंद्रीय कानून)UP RERA (राज्य स्तरीय अथॉरिटी)
स्वरूपसंसद द्वारा बनाया गया केंद्रीय कानूनउत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित वैधानिक प्राधिकरण
लागू क्षेत्रसम्पूर्ण भारतकेवल उत्तर प्रदेश
उद्देश्यरियल एस्टेट क्षेत्र के लिए कानूनी ढांचा तैयार करनाराज्य में कानून का प्रभावी क्रियान्वयन करना
मुख्य कार्यकानून बनाना, संशोधन एवं राष्ट्रीय नीतिपरियोजनाओं एवं एजेंटों का पंजीकरण, शिकायतों का निस्तारण, आदेश जारी करना
नियंत्रणभारत सरकार (MoHUA)राज्य स्तर पर गठित RERA Authority

उदहारण स्वरूप जैसे यदि संसद कोई ट्रैफिक कानून बनाती है, तो वह पूरे देश पर लागू होता है। लेकिन उस कानून का पालन करवाने का कार्य प्रत्येक राज्य की ट्रैफिक पुलिस करती है। ठीक इसी प्रकार—

  • RERA Act, 2016  पूरे देश का मूल कानून है जोकि सम्पूर्ण देश में लागू होता है। जबकि UP RERA मात्र उत्तर प्रदेश में उस कानून को लागू करने वाली अथॉरिटी।
  • RERA भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक महत्वपूर्ण केंद्रीय कानून है, जिसका उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में ग्राहकों की शिकायत की सुनवाई, जवाबदेही तथा खरीदारों के अधिकारों की रक्षा करना है। जबकि UP RERA इस कानून के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में कार्य करने वाली नियामक अथॉरिटी है, जो परियोजनाओं(प्रोजेक्टों ) का पंजीकरण, शिकायतों की सुनवाई तथा कानून के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करती है।
  • इस प्रकार, RERA और UP RERA अलग संस्थाएँ नहीं हैं, बल्कि एक ही कानूनी व्यवस्था के दो स्तर हैं—केंद्र कानून बनाता है और राज्य उसकी प्रभावी पालना सुनिश्चित करता है।

RERA का केंद्रीय कानून (Central Law)

Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 भारत सरकार द्वारा पारित एक केंद्रीय कानून है। यह पूरे देश के लिए एक समान कानूनी ढांचा (Legal Framework) प्रदान करता है।

जिसे रियल एस्टेट सेक्टर को विनियमित (Regulate) करने के लिए बनाई गई संस्था रेरा (RERA) के नाम से जाता है। RERA का पूरा नाम रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 (Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016) है।

रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 भारत में 1 मई 2016 से लागू हुआ। इस कानून का मुख्य उद्देश्य खरीदारों के अधिकारों की रक्षा करना, और रियल एस्टेट उद्योग में पारदर्शिता को बढ़ाना तथा निवेशकों और उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करना है। आज के दौर में निवेशक अपनी सम्पति की सुरक्षा और समाधान के लिए रेरा के अंतर्गत अपनी शिकायतों को दर्ज भी करा रहे हैं और समाधान भी पा रहे हैं। ‘

उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 (RERA Act, 2016) को लागू करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) अधिनियम, 2016 अधिसूचित किए गए।

UP RERA नियम 2016 – सम्पूर्ण जानकारी

RERA Act, 2016 – संक्षिप्त परिचय (Brief Introduction)

शहरी विकास अधिसूचना

नई दिल्ली, दिनांक 24 नवम्बर, 2016

सा.का.नि. 1085(अ) — केंद्र सरकार, भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (2016 का 16) की धारा 84 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा 2 के खंड (छ) के उप-खंड (iii) के अनुसरण में निम्नलिखित नियम बनाती है,

National Capital Territory of Delhi Real Estate (Regulation and Development) (General) Rules, 2016

https://upload.indiacode.nic.in/showfile?actid=AC_CEN_17_19_00033_201616_1517807328405&type=rule&filename=Gztt.Notfn.%20RERA%20Act%20Delhi%20and%20Rules%20_amp_%20Regulation%20for%20GNCTD%20.pdf

RERA के मुख्य कार्य

  • रियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीकरण (Project Registration)
  • रियल एस्टेट एजेंटों का पंजीकरण
  • बिल्डरों द्वारा दी गई जानकारी की निगरानी
  • खरीदारों की शिकायतों की सुनवाई
  • आदेश जारी करना तथा उनका अनुपालन सुनिश्चित करना
  • परियोजनाओं की प्रगति (Quarterly Progress Reports) की निगरानी
  • खरीदारों के लिए ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध कराना।

उत्तर प्रदेश RERA 2016 में Section and Chapter, – संरचना एवं रूपरेखा (Structure & Framework)

प्रथम अध्याय में दी गई महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

नीचे रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 (RERA Act, 2016) के 10 अध्याय (Chapters) तथा उनके अंतर्गत आने वाली धाराओं (Sections) का हिंदी विवरण दिया गया है। यह संरचना अधिनियम की आधिकारिक रूपरेखा पर आधारित है।

ChapterEnglishहिंदीSections
Chapter 1Preliminaryप्रारंभिकSections 1–2
Chapter 2Registration of Real Estate Project and Registration of Real Estate Agentsरियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीकरण तथा रियल एस्टेट एजेंटों का पंजीकरणSections 3–10
Chapter 3Functions and Duties of Promoterप्रवर्तक (Promoter) के कार्य एवं कर्तव्यSections 11–18
Chapter 4Rights and Duties of Allotteesआवंटियों (Allottees) के अधिकार एवं कर्तव्यSection 19
Chapter 5The Real Estate Regulatory Authorityरियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरणSections 20–40
Chapter 6Central Advisory Councilकेंद्रीय सलाहकार परिषदSections 41–42
Chapter 7The Real Estate Appellate Tribunalरियल एस्टेट अपीलीय अधिकरणSections 43–58
Chapter 8Offences, Penalties and Adjudicationअपराध, दंड एवं न्यायनिर्णयनSections 59–72
Chapter 9Finance, Accounts, Audits and Reportsवित्त, लेखे, लेखा-परीक्षा एवं प्रतिवेदनSections 73–78
Chapter 10MiscellaneousविविधSections 79–92

कुल अध्याय (Chapters): 10
कुल धाराएँ (Sections): 92

यह प्रारूप Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 के आधिकारिक अध्यायों और धाराओं के अनुरूप है।

नीचे RERA Act, 2016 की धारा 2 (Definitions) के अंतर्गत शुरुआती परिभाषाएँ धारा सहित दी जा रही हैं। ये अधिनियम की आधिकारिक परिभाषाओं के अनुरूप हैं।

धाराअंग्रेज़ी (Official Term)हिंदी
धारा 2(a)Adjudicating Officerन्यायनिर्णायक अधिकारी
धारा 2(b)Advertisementविज्ञापन
धारा 2(c)Agreement for Saleविक्रय हेतु अनुबंध (बिक्री अनुबंध)
धारा 2(d)Allotteeआवंटी
धारा 2(e)Apartmentअपार्टमेंट (फ्लैट/आवासीय इकाई)
धारा 2(f)Appellate Tribunalअपीलीय अधिकरण
धारा 2(g)Appropriate Governmentसमुचित सरकार
धारा 2(h)Architectवास्तुकार
धारा 2(i)Authorityप्राधिकरण
धारा 2(j)Buildingभवन
धारा 2(k)Carpet Areaकार्पेट क्षेत्रफल
धारा 2(l)Chairpersonअध्यक्ष
धारा 2(m)Commencement Certificateनिर्माण प्रारंभ प्रमाणपत्र
धारा 2(n)Common Areasसामान्य क्षेत्र
धारा 2(o)Companyकंपनी
धारा 2(p)Competent Authorityसक्षम प्राधिकारी
धारा 2(q)Completion Certificateपूर्णता प्रमाणपत्र
धारा 2(r)Dayदिन
धारा 2(s)Developmentविकास
धारा 2(t)Development Worksविकास कार्य
धारा 2(u)Engineerअभियंता (इंजीनियर)
धारा 2(v)Estimated Cost of Real Estate Projectरियल एस्टेट परियोजना की अनुमानित लागत
धारा 2(w)External Development Worksबाह्य विकास कार्य
धारा 2(x)Familyपरिवार
धारा 2(y)Garageगैराज
धारा 2(z)Immovable Propertyअचल संपत्ति
धारा 2(za)Interestब्याज
धारा 2(zb)Internal Development Worksआंतरिक विकास कार्य
धारा 2(zc)Local Authorityस्थानीय प्राधिकरण
धारा 2(zd)Memberसदस्य
धारा 2(ze)Notificationअधिसूचना
धारा 2(zf)Occupancy Certificateअधिभोग प्रमाणपत्र (ऑक्यूपेंसी प्रमाणपत्र)
धारा 2(zg)Personव्यक्ति
धारा 2(zh)Planning Areaयोजना क्षेत्र
धारा 2(zi)Prescribedविहित (नियमों द्वारा निर्धारित)
धारा 2(zj)Projectपरियोजना
धारा 2(zk)Promoterप्रवर्तक (बिल्डर/डेवलपर)
धारा 2(zl)Prospectusप्रॉस्पेक्टस (विवरणिका)
धारा 2(zm)Real Estate Agentरियल एस्टेट एजेंट
धारा 2(zn)Real Estate Projectरियल एस्टेट परियोजना
धारा 2(zo)Regulationsविनियम
धारा 2(zp)Ruleनियम
धारा 2(zq)Sanctioned Planस्वीकृत योजना
धारा 2(zr)Words and expressions used herein but not defined in this Act…इस अधिनियम में प्रयुक्त वे शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ जिनकी परिभाषा इस अधिनियम में नहीं दी गई है, परंतु जो किसी प्रचलित विधि, नगर निगम कानून अथवा समुचित सरकार के अन्य प्रासंगिक कानूनों में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो उन संबंधित कानूनों में निर्धारित किया गया है।

Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 (RERA Act) को इन आधिकारिक स्रोतों से पढ़ या डाउनलोड कर सकते हैं:

  1. India Code (भारत सरकार का आधिकारिक कानून पोर्टल)
    The Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016
  2. Ministry of Housing & Urban Affairs (MoHUA) – RERA पेज
    RERA Act, 2016 – Official MoHUA Page
  3. Acts & Policies (MoHUA)
    Acts and Policies – RERA Documents

उपरोक्त धारा में रियल एस्टेट क्षेत्र से संबंधित विभिन्न प्रावधानों, अधिकारों, दायित्वों तथा प्रक्रियाओं का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसलिए, जब भी कोई व्यक्ति घर, फ्लैट, प्लॉट या अन्य अचल संपत्ति खरीदने का निर्णय ले, तो उसे केवल परियोजना(प्रोजेक्ट) या कंपनी की जानकारी तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि RERA अधिनियम, 2016 तथा संबंधित राज्य के RERA नियमों की भी समुचित जानकारी अवश्य प्राप्त करनी चाहिए। इससे खरीदार अपने कानूनी अधिकारों एवं दायित्वों को बेहतर ढंग से समझ सकता है तथा सुरक्षित, पारदर्शी और विवेकपूर्ण निवेश का निर्णय ले सकता है।

यदि आप RERA अधिनियम एवं उत्तर प्रदेश RERA नियमों के बारे में विस्तृत और आधिकारिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) द्वारा प्रकाशित आधिकारिक दस्तावेज़ का अध्ययन कर सकते हैं। इसमें अधिनियम, धारायें एवं नियमों से संबंधित विस्तृत प्रावधान, प्रक्रियाएँ और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।

https://www.youtube.com/watch?v=6ZBxdiMK6Ak

UP RERA कॉन्क्लेव ई-बुक

यदि कोई व्यक्ति RERA अधिनियम, 2016 तथा उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) के कार्यों, प्रक्रियाओं और व्यवहारिक पहलुओं के बारे में अधिक विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहता है, तो वह UP RERA Conclave E-Book (Best Practices by UP RERA) का अध्ययन कर सकता है। यह ई-बुक RERA से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण विषयों को सरल एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है।

इस ई-बुक में उत्तर प्रदेश RERA से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी विशेष रूप से पृष्ठ संख्या 62 से 89 के मध्य दी गई है। इन पृष्ठों में उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण की कार्यप्रणाली, शिकायत निवारण प्रणाली तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों का विस्तृत विवरण उपलब्ध है।

ई-बुक में प्रयुक्त प्रमुख संक्षिप्त शब्द (Abbreviations)

  • CA – चार्टर्ड अकाउंटेंट (Chartered Accountant)
  • CG – छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh)
  • DPI – विस्तृत परियोजना जानकारी (Detailed Project Information)
  • KYC – अपने ग्राहक को जानें (Know Your Customer)
  • NCR – राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (National Capital Region)
  • NOC – अनापत्ति प्रमाण-पत्र (No Objection Certificate)
  • RC – रिकवरी चालान (Recovery Certificate)
  • RERA – रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (Real Estate Regulatory Authority)
  • SRO – स्व-नियामक संगठन (Self-Regulatory Organization)
  • OC – अधिभोग प्रमाण-पत्र (Occupancy Certificate)

उत्तर प्रदेश RERA से संबंधित प्रमुख विषय

ई-बुक के पृष्ठ 62 से 89 के अंतर्गत मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई है—

  • उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (U.P. Real Estate Regulatory Authority)
  • शिकायतों के प्रबंधन एवं निस्तारण के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया (Protocol for Grievance Management)

यह ई-बुक 4 नवम्बर 2019 को लखनऊ से प्रकाशित की गई थी तथा इसके लेखक राजीव कुमार (Rajive Kumar), तत्कालीन Chairperson, U.P. Real Estate Regulatory Authority हैं।

यदि आप RERA की कार्यप्रणाली, शिकायत निवारण प्रक्रिया तथा उत्तर प्रदेश RERA की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) को विस्तार से समझना चाहते हैं, तो इस आधिकारिक ई-बुक का अध्ययन अवश्य करें।

https://www.up-rera.in/pdf/Best_Practices_by_UP-RERA.pdf

रेरा (RERA) के प्रमुख उद्देश्य और लाभ

  • घर तथा संपत्ति खरीदारों (Homebuyers) के हितों की रक्षा करना।
  • रियल एस्टेट परियोजनाओं(प्रोजेक्ट) में पारदर्शिता को बढ़ाना।
  • बिल्डरों, ब्रोकर एवं डेवलपर्स की जवाबदेही सुनिश्चित करना।
  • परियोजनाओं (प्रोजेक्ट) की समय पर डिलीवरी को बढ़ावा देना।
  • रियल एस्टेट विवादों का त्वरित समाधान उपलब्ध कराना।
  • निवेशकों और खरीदारों का विश्वास बढ़ाना।
  • उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र का सुव्यवस्थित विकास करना।

जिस प्रकार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI – Reserve Bank of India) देश की बैंकिंग प्रणाली, वित्तीय संस्थानों और मुद्रा व्यवस्था का नियमन करता है तथा सेबी (SEBI – Securities and Exchange Board of India) शेयर बाज़ार और प्रतिभूति बाजार का नियामक है, उसी प्रकार रेरा (RERA – Real Estate Regulatory Authority) रियल एस्टेट क्षेत्र को विनियमित करने के लिए स्थापित एक नियामक प्राधिकरण है।

रेरा का मुख्य उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करना है। यह प्राधिकरण संपत्ति खरीदारों के हितों की रक्षा करता है तथा रियल एस्टेट परियोजनाओं(प्रोजेक्ट) से संबंधित विवादों और शिकायतों के समाधान के लिए एक कानूनी मंच उपलब्ध कराता है।

भारत के प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में, जहाँ रेरा लागू है, वहाँ संबंधित राज्य सरकार द्वारा एक रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA Authority) का गठन किया जाता है। यह प्राधिकरण रियल एस्टेट परियोजनाओं (प्रोजेक्ट)और रियल एस्टेट एजेंटों के पंजीकरण, निगरानी तथा अधिनियम के अनुपालन की देखरेख करता है।

जब कोई बिल्डर या डेवलपर नई रियल एस्टेट परियोजना(प्रोजेक्ट) लॉन्च करता है, तो उसे रेरा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार परियोजना(प्रोजेक्ट) का पंजीकरण कराना होता है (जहाँ कानून के अनुसार पंजीकरण आवश्यक हो)। पंजीकरण के समय डेवलपर को परियोजना(प्रोजेक्ट) से संबंधित आवश्यक दस्तावेज, भूमि का विवरण, स्वामित्व संबंधी जानकारी, स्वीकृत नक्शे, आवश्यक अनुमतियाँ, निर्माण की समय-सीमा तथा अन्य निर्धारित जानकारी संबंधित रेरा प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करनी होती है।

सभी आवश्यक दस्तावेजों और जानकारी का परीक्षण करने के बाद, यदि परियोजना(प्रोजेक्ट) अधिनियम की शर्तों को पूरा करती है, तो उसे एक विशिष्ट RERA पंजीकरण संख्या (RERA Registration Number) प्रदान की जाती है। यह संख्या प्रत्येक परियोजना(प्रोजेक्ट) के लिए अलग होती है और उसी के माध्यम से खरीदार परियोजना(प्रोजेक्ट) की जानकारी संबंधित राज्य की रेरा वेबसाइट पर सत्यापित कर सकते हैं।

RERA पंजीकरण संख्या की कोई एक निश्चित लंबाई या निर्धारित अंकों की संख्या नहीं होती। यह सामान्यतः एक अल्फान्यूमेरिक (Alphanumeric) कोड होता है, जिसमें अंग्रेज़ी अक्षर और अंक दोनों शामिल होते हैं। इसका प्रारूप अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकता है, इसलिए सभी राज्यों में इसकी संरचना समान होना आवश्यक नहीं है।

सामान्यतः RERA पंजीकरण संख्या में निम्न प्रकार की जानकारी शामिल हो सकती है—

  • प्रोजेक्ट या एजेंट का प्रकार – यह दर्शाता है कि पंजीकरण किसी परियोजना (Project) का है या किसी रियल एस्टेट एजेंट (Agent) का।
  • राज्य का कोड – संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की पहचान।
  • पंजीकरण वर्ष अथवा प्राधिकरण कोड – पंजीकरण से संबंधित वर्ष या अन्य प्रशासनिक पहचान।
  • विशिष्ट क्रम संख्या (Unique Serial Number) – संबंधित परियोजना या एजेंट की अलग पहचान।

उदाहरण के लिए, NX One (ग्रेटर नोएडा वेस्ट) परियोजना(प्रोजेक्ट) का एक RERA पंजीकरण नंबर UPRERAPRJ448845 है। इस प्रकार के पंजीकरण नंबर की सहायता से खरीदार संबंधित राज्य की RERA वेबसाइट पर जाकर परियोजना(प्रोजेक्ट) की पंजीकरण स्थिति तथा उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं।

भारत के विभिन्न राज्यों में RERA के नाम

भारत में Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 (RERA) एक केंद्रीय कानून है, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक राज्य ने अपनी Real Estate Regulatory Authority (RERA Authority) का गठन किया है। इसलिए प्रत्येक राज्य में RERA उस राज्य के नाम से जानी जाती है, जैसे UP RERA (Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority), Delhi RERA (Delhi Real Estate Regulatory Authority), MahaRERA (Maharashtra Real Estate Regulatory Authority) आदि। भारत के किसी भी राज्य का Home Buyer (उपभोक्ता), Allottee (आवंटी) या अन्य पात्र व्यक्ति अपने राज्य की संबंधित RERA Authority में शिकायत (Complaint) दर्ज करा सकता है। सामान्यतः शिकायत उसी राज्य की RERA में की जाती है जहाँ संबंधित Real Estate Project, Plot, Apartment, Building या Property स्थित हो।

उदाहरण (Example):

  • यदि मामला Delhi में स्थित किसी Real Estate Project का है, तो शिकायत Delhi RERA में दर्ज की जाएगी।
  • यदि मामला Uttar Pradesh (UP) का है, तो शिकायत UP RERA में दर्ज की जाएगी।
  • यदि मामला Maharashtra का है, तो शिकायत MahaRERA में की जाएगी।
  • यदि मामला Haryana का है, तो शिकायत HRERA (Haryana RERA) में दर्ज होगी।

इस प्रकार, प्रत्येक राज्य की RERA Authority अपने राज्य के अंतर्गत आने वाले Real Estate Projects और उनसे संबंधित विवादों, शिकायतों तथा उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुनवाई एवं निस्तारण का कार्य करती है।

बिल्डरों की प्रमुख जिम्मेदारियाँ

  • निर्धारित सीमा से अधिक परियोजनाओं का RERA में पंजीकरण कराना।
  • परियोजना की सही एवं अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराना।
  • खरीदारों से प्राप्त धनराशि का उपयोग कानून के अनुसार करना।
  • निर्माण कार्य समय पर पूरा करना।
  • स्वीकृत योजना के अनुसार निर्माण करना।
  • सभी आवश्यक अनुमतियाँ एवं दस्तावेज़ उपलब्ध कराना।

भारत के सभी राज्यों के रेरा Authority के नाम निम्नलिखित प्रकार से हैं। 

Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority (UP RERA)
Maharashtra Real Estate Regulatory Authority (MahaRERA)
Gujarat Real Estate Regulatory Authority
Rajasthan Real Estate Regulatory Authority
Haryana Real Estate Regulatory Authority (गुरुग्राम और पंचकुला बेंच)
Delhi Real Estate Regulatory Authority (Delhi RERA)
Punjab Real Estate Regulatory Authority
Madhya Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Bihar Real Estate Regulatory Authority
Jharkhand Real Estate Regulatory Authority
Chhattisgarh Real Estate Regulatory Authority
Odisha Real Estate Regulatory Authority
West Bengal Real Estate Regulatory Authority (राज्य में अलग कानून HIRA भी लागू रहा है)
Assam Real Estate Regulatory Authority
Tripura Real Estate Regulatory Authority
Mizoram Real Estate Regulatory Authority
Nagaland Real Estate Regulatory Authority
Meghalaya Real Estate Regulatory Authority
Manipur Real Estate Regulatory Authority
Sikkim Real Estate Regulatory Authority
Goa Real Estate Regulatory Authority
Kerala Real Estate Regulatory Authority
Tamil Nadu Real Estate Regulatory Authority
Karnataka Real Estate Regulatory Authority
Andhra Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Telangana Real Estate Regulatory Authority

जिस प्रकार यह राज्यों में कार्यरत है ठीक उसी प्रकार यह भारत के केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) में भी लागू है।  

  • Chandigarh Real Estate Regulatory Authority
  • Andaman and Nicobar Islands Real Estate Regulatory Authority
  • Dadra and Nagar Haveli and Daman and Diu Real Estate Regulatory Authority
  • Ladakh Real Estate Regulatory Authority
  • Jammu and Kashmir Real Estate Regulatory Authority
  • Puducherry Real Estate Regulatory Authority

महत्वपूर्ण बात यह है कि 

  • Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 पूरे भारत के लिए केंद्रीय कानून है। जोकि सभी राज्यों के सामान अधिकार प्रदान करता है। 
  • प्रत्येक राज्य/UT उसी कानून के आधार पर अपना RERA प्राधिकरण संचालित करता है।
  • लेकिन कुछ नियम (Rules) और प्रक्रियाएँ राज्य के अनुसार कुछ हद तक अलग हो सकती हैं, परन्तु खरीदारों के मूल अधिकार और बिल्डरों की जिम्मेदारियाँ केंद्रीय अधिनियम से निर्धारित होती हैं।

रियल एस्टेट क्षेत्र में नियामक प्राधिकरण (RERA) की आवश्यकता क्यों पड़ी?

‘रियल एस्टेट’ का शाब्दिक अर्थ ही ‘वास्तविक संपदा’ है, लेकिन एक समय इस क्षेत्र की जमीनी हकीकत इसके नाम के बिल्कुल विपरीत हो चुकी थी। बिल्डरों और डेवलपर्स की मनमानी और धोखाधड़ी के कारण यह पूरा सेक्टर बदनाम हो रहा था। हालांकि आज भी कुछ जगहों पर स्थितियां पूरी तरह नहीं बदली हैं, लेकिन इस अव्यवस्था को रोकने के लिए ही नियामक प्राधिकरण (जैसे RERA) का जन्म हुआ।

इसे हम मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों और परिस्थितियों के माध्यम से समझ सकते हैं:

1. संकट का दौर (वर्ष 2015-2016)

इस अवधि के दौरान रियल एस्टेट सेक्टर अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा था। चौतरफा शिकायतों के कारण पूरे उद्योग पर भारी दबाव था।

  • अधूरी परियोजनाएं(प्रोजेक्ट): बड़ी संख्या में आवासीय और वाणिज्यिक प्रोजेक्ट्स अचानक रुक गए थे। जमीनी स्तर पर काम पूरी तरह ठप था।
  • पूंजी का फंसना: घर खरीदारों ने अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई इन परियोजनाओं(प्रोजेक्ट) में लगा दी थी, लेकिन उन्हें पजेशन (कब्जा) मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी।

2. खरीदारों की लाचारी और सुनवाई का अभाव

  • सीमित विकल्प: ठगे गए खरीदारों के पास अपनी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए कोई ठोस कानूनी मंच या विकल्प मौजूद नहीं था।
  • बिल्डरों की संवेदनहीनता: शिकायत करने पर डेवलपर्स और बिल्डर्स खरीदारों को कोई संतोषजनक जवाब या प्रतिक्रिया नहीं देते थे।
  • प्राधिकरणों की लाचारी: तत्कालीन विकास प्राधिकरणों (Development Authorities) के पास इन निजी बिल्डरों को नियंत्रित करने या उन पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त कानूनी अधिकार नहीं थे।

3. व्यवस्था में सुधार की तत्काल आवश्यकता

उस समय रियल एस्टेट क्षेत्र को पूरी तरह डूबने से बचाने के लिए तीन चीजों की सख्त जरूरत थी, जिन्हें और अधिक नजरअंदाज करना नामुमकिन था:

  • पारदर्शिता (Transparency): ताकि खरीदार को पता हो कि उसका पैसा कहाँ लग रहा है।
  • वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline): ताकि बिल्डर एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट में न लगा सकें।
  • समयबद्धता (Timely Completion): परियोजनाओं(प्रोजेक्ट) को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना।

उपभोक्ताओं (घर खरीदारों) के हितों की रक्षा करने, बाजार में पारदर्शिता लाने और रियल एस्टेट सेक्टर को एक सुरक्षित एवं जवाबदेह उद्योग के रूप में बदलने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया। सरकार ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) की स्थापना का निर्णय लिया, ताकि इस क्षेत्र को सही दिशा और खरीदारों को उनका हक मिल सके।

 रियल एस्टेट में पारदर्शिता का नया दौर: RERA की आवश्यकता और प्रभाव

रियल एस्टेट (Real Estate) में पारदर्शिता (Transparency), खरीदारों के अधिकार (Buyers’ Rights) एवं सुरक्षा (Protection) कैसे सुनिश्चित होती है?

RERA के लागू होने से Home Buyers (घर खरीदारों), Plot Buyers (प्लॉट खरीदारों) तथा अन्य Property Purchasers (संपत्ति क्रेताओं) को अनेक महत्वपूर्ण Legal Rights (कानूनी अधिकार) प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही Promoters (बिल्डर्स) एवं Real Estate Agents (रियल एस्टेट एजेंट/ब्रोकर) द्वारा किए जाने वाले False Commitments (झूठे वादे), Misleading Advertisements (भ्रामक विज्ञापन), Unfair Trade Practices (अनुचित व्यापारिक व्यवहार) तथा Fraud (धोखाधड़ी) की संभावनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।

अब अधिकांश Real Estate Projects (रियल एस्टेट परियोजनाओं) का RERA Registration (रेरा पंजीकरण) अनिवार्य है। इससे खरीदार Project Details (परियोजना का विवरण), Approved Layout Plan (स्वीकृत लेआउट प्लान), Construction Status (निर्माण की प्रगति), Possession Timeline (कब्जा देने की समय-सीमा) तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों की पुष्टि कर सकते हैं।

यदि किसी खरीदार के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वह RERA Authority (रेरा प्राधिकरण) के समक्ष Complaint (शिकायत) दर्ज कर उचित Relief (राहत) एवं Compensation (क्षतिपूर्ति) प्राप्त करने का अधिकार रखता है।

इसी कारण RERA Act, 2016 को भारतीय Real Estate Industry में Transparency (पारदर्शिता), Fairness (निष्पक्षता), Accountability (जवाबदेही) तथा Buyer Protection (खरीदारों के हितों की सुरक्षा) सुनिश्चित करने वाला एक महत्वपूर्ण कानून माना जाता है।

बिना RERA Registration के कोई विज्ञापन नहीं: अब कोई भी Builder (बिल्डर) या Developer अपने Real Estate Project (रियल एस्टेट परियोजना) का किसी भी प्रकार का Advertisement (विज्ञापन), Marketing (प्रचार), Booking (बुकिंग) या Sale (बिक्री) तब तक नहीं कर सकता, जब तक परियोजना(प्रोजेक्ट) का RERA Registration न हो। इसी प्रकार, कोई भी रियल एस्टेट एजेंट/ब्रोकर बिना वैध RERA Registration के किसी परियोजना (प्रोजेक्ट)का प्रचार, बुकिंग या बिक्री नहीं कर सकता। इसलिए अब सभी Builders, Developers एवं Real Estate Agents के लिए RERA के अंतर्गत पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य हो गया है।

सुपर बिल्ट-अप नहीं, ‘कार्पेट एरिया’ का नियम: पहले बिल्डर सुपर बिल्ट-अप एरिया के नाम पर दीवारें और बालकनी जोड़कर पैसे वसूलते थे। अब बिल्डर्स को सिर्फ कार्पेट एरिया (Carpet Area) यानी जितने हिस्से में आप सचमुच रह सकते हैं, उसके हिसाब से कीमत तय करनी होती है।

  • देरी होने पर जुर्माना (Penalty for Delay): अगर बिल्डर तय समय पर पजेशन (कब्जा) नहीं देता है, तो उसे खरीदार को हर महीने का ब्याज (Penalty) देना होगा। इसी तरह, अगर खरीदार पेमेंट में देरी करता है, तो उसे भी ब्याज देना होगा (दोनों के लिए ब्याज दर समान होती है)।
  • 5 साल की वारंटी (Structural Defect): पजेशन मिलने के 5 साल के भीतर अगर बिल्डिंग के स्ट्रक्चर में कोई खराबी (जैसे सीलन, दरारें आदि) आती है, तो बिल्डर को उसे अपने खर्च पर 30 दिनों के भीतर ठीक करना होगा।

रेरा (RERA) के प्रमुख लाभ

1. धोखाधड़ी और फर्जी परियोजनाओं (प्रोजेक्ट)पर प्रभावी नियंत्रण

रेरा(RERA) लागू होने के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता काफी बढ़ी है। अब प्रत्येक बिल्डर के लिए अपनी आवासीय या व्यावसायिक परियोजना(प्रोजेक्ट) का (RERA)रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। बिना रेरा पंजीकरण के किसी भी फ्लैट, प्लॉट या अन्य संपत्ति का प्रचार या विक्रय नहीं किया जा सकता। इससे फर्जी प्रोजेक्टों और धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आई है तथा खरीदारों का निवेश पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हुआ है।

2. समयबद्ध परियोजना(प्रोजेक्ट) पूर्ण होने की गारंटी

पहले कई परियोजनाएँ(प्रोजेक्ट) वर्षों तक अधूरी पड़ी रहती थीं, जिससे खरीदारों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। रेरा के अंतर्गत बिल्डर को परियोजना(प्रोजेक्ट) पूरी करने की निश्चित समय-सीमा घोषित करनी होती है। यदि निर्धारित समय में कब्जा नहीं दिया जाता, तो कई परिस्थितियों में खरीदार को कानून के अनुसार ब्याज या अन्य राहत प्राप्त करने का अधिकार होता है। इससे परियोजनाओं(प्रोजेक्ट) को समय पर पूरा करने की जवाबदेही बढ़ी है।

3. खरीदारों के धन की रक्षा

रेरा(RERA) का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि परियोजना(प्रोजेक्ट) से प्राप्त राशि का लगभग 70% एक अलग एस्क्रो (Escrow) बैंक खाते में रखा जाता है। इस धनराशि का उपयोग केवल उसी परियोजना(प्रोजेक्ट) के निर्माण और उससे संबंधित कार्यों में किया जा सकता है। इससे खरीदारों के पैसे का अन्य परियोजनाओं(प्रोजेक्ट) में दुरुपयोग रुकता है और निर्माण कार्य निरंतर गति से आगे बढ़ता है।

4. भ्रामक विज्ञापनों और झूठे वादों पर रोक

पहले कई बिल्डर आकर्षक विज्ञापनों और ब्रोशर में ऐसी सुविधाओं का वादा करते थे जो वास्तविक परियोजना(प्रोजेक्ट) में उपलब्ध नहीं होती थीं। रेरा लागू होने के बाद बिल्डर द्वारा प्रचारित प्रत्येक सुविधा, नक्शा, विनिर्देश (Specifications) और अन्य वादे कानूनी रूप से बाध्यकारी हो गए हैं। यदि बिल्डर अपने घोषित वादों का पालन नहीं करता, तो खरीदार रेरा के समक्ष शिकायत दर्ज कर उचित राहत प्राप्त कर सकता है।

5. पारदर्शिता और खरीदारों का विश्वास

रेरा(RERA) पोर्टल पर परियोजना(प्रोजेक्ट) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे स्वीकृत नक्शे, निर्माण की प्रगति, आवश्यक अनुमतियाँ तथा परियोजना(प्रोजेक्ट) की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहती है। इससे खरीदार निवेश करने से पहले पूरी जानकारी प्राप्त कर सूचित निर्णय ले सकते हैं और रियल एस्टेट क्षेत्र में विश्वास एवं पारदर्शिता दोनों मजबूत हुए हैं।

https://www.up-rera.in

RERA के माध्यम से Buyers के अधिकारों की सुरक्षा

रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 [RERA] का उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और खरीदारों के अधिकारों को मजबूत करना है। इस (RERA )कानून के माध्यम से बिल्डरों, प्रमोटरों और रियल एस्टेट एजेंटों के कार्यों को सुव्यवस्थित किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

1. राज्य स्तर पर नियामक प्राधिकरण की स्थापना

प्रत्येक राज्य में रियल एस्टेट से जुड़े मामलों की निगरानी एवं शिकायतों के निस्तारण के लिए राज्य रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (State RERA) का गठन किया गया है। यह संस्था खरीदारों और डेवलपर्स के बीच उत्पन्न विवादों का निष्पक्ष समाधान प्रदान करती है।

2. आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाओं(प्रोजेक्ट) का नियमन

रेरा केवल आवासीय (Residential) परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यावसायिक (Commercial) परियोजनाओं (प्रोजेक्ट) पर भी समान रूप से लागू होता है। इससे संपूर्ण रियल एस्टेट क्षेत्र एक समान नियामक व्यवस्था के अंतर्गत आता है।

3. परियोजना (प्रोजेक्ट) की संपूर्ण जानकारी सार्वजनिक करना

किसी भी परियोजना(प्रोजेक्ट) का पंजीकरण कराने से पहले डेवलपर को परियोजना(प्रोजेक्ट) का स्वीकृत नक्शा, लेआउट, आवश्यक सरकारी अनुमतियाँ, भूमि के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज, निर्माण की समय-सीमा तथा अन्य आवश्यक विवरण RERA के समक्ष प्रस्तुत करने होते हैं। यही जानकारी बाद में खरीदारों के लिए भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे वे पूरी जानकारी के आधार पर निवेश का निर्णय ले सकें।

4. नियमों के उल्लंघन पर कठोर दंड

यदि कोई डेवलपर RERA अथवा अपीलीय अधिकरण (Appellate Tribunal) के आदेशों का पालन नहीं करता, तो उसके विरुद्ध आर्थिक दंड के साथ-साथ कानून के अनुसार कारावास की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसका उद्देश्य कानून के प्रभावी पालन को सुनिश्चित करना है।

5. परियोजना(प्रोजेक्ट) में देरी होने पर खरीदार के अधिकार

यदि बिल्डर अपने निर्धारित समय के भीतर (प्रोजेक्ट) पूरा नहीं करता, तो खरीदार को कानून के अनुसार निर्धारित ब्याज अथवा अन्य वैधानिक राहत प्राप्त करने का अधिकार होता है। इससे परियोजनाओं(प्रोजेक्ट) को समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी डेवलपर पर सुनिश्चित होती है।

6. खरीदार की सहमति के बिना बदलाव नहीं

बहुत से डेवलपर परियोजना (प्रोजेक्ट)के स्वीकृत नक्शे, डिज़ाइन या पहले से बेची गई इकाइयों में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन खरीदारों की आवश्यक लिखित सहमति के बिना नहीं कर सकताहै। इससे खरीदारों के हितों और धन की प्रभावी सुरक्षा होती है।

RERA के ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण मामले (Landmark Judgments)

रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (RERA) को सही तरीके से लागू करने और घर खरीदारों (Allottees) के अधिकारों को मजबूत करने में न्यायपालिका के कुछ फैसलों ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। यहाँ RERA से जुड़े दो सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक मामलों का विवरण दिया गया है:

1. नीलकमल रियल्टर्स सबअर्बन प्रा. लि. बनाम भारत संघ (2017)

Neelkamal Realtors Suburban Pvt Ltd vs Union of India

https://indiankanoon.org/doc/82600930/

न्यायालय: बॉम्बे हाईकोर्ट महत्व: यह RERA के इतिहास का सबसे शुरुआती और बुनियादी मामला माना जाता है।

  • मुख्य बिंदु: इस मामले में बिल्डरों द्वारा RERA कानून की संवैधानिक वैधता (Constitutional Validity) को चुनौती दी गई थी।
  • अदालत का निर्णय: बॉम्बे हाईकोर्ट ने RERA की संवैधानिक वैधता को पूरी तरह बरकरार रखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कानून खरीदारों के हितों की रक्षा करने और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए पूरी तरह सही है। इसके बाद से देश भर के अन्य RERA मामलों में इस निर्णय को एक बुनियादी संदर्भ (Reference) के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा।

2. मेसर्स न्यूटेक प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्रा. लि. बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य (2021)

https://theamikusqriae.com/m-s-newtech-promoters-and-developers-pvt-ltd-v-state-of-up-ors-2021/

न्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) महत्व: यह सुप्रीम कोर्ट का एक ऐसा ऐतिहासिक निर्णय है जिसने RERA अथॉरिटी की शक्तियों को अंतिम रूप से स्पष्ट कर दिया।

  • मुख्य बिंदु: इस मामले में यह विवाद था कि क्या RERA अथॉरिटी के पास बिल्डरों को रिफंड (पैसा वापस करने) या ब्याज देने का निर्देश देने का अधिकार है, और क्या यह कानून पहले से चल रहे प्रोजेक्ट्स (Ongoing Projects) पर लागू होता है।
  • अदालत का निर्णय: सर्वोच्च न्यायालय ने घर खरीदारों के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए निम्नलिखित बातें स्पष्ट कीं:
    • अथॉरिटी की शक्तियां: RERA अथॉरिटी के पास बिल्डर को खरीदार का पैसा ब्याज सहित वापस (Refund) करने का निर्देश देने का पूरा अधिकार है।
    • पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Application): RERA कानून उन प्रोजेक्ट्स पर भी लागू होगा जो इसके लागू होने से पहले शुरू हुए थे लेकिन अभी तक पूरे नहीं हुए हैं (Ongoing Projects)।
    • खरीदारों का अधिकार: यदि बिल्डर पजेशन (कब्जा) देने में देरी करता है, तो खरीदार को अपनी रकम वापस मांगने का बिना शर्त अधिकार है।

https://www.livelaw.in/top-stories/homebuyers-20-year-plight-forces-supreme-court-to-question-rera-mechanisms-efficacy-540942

संपत्ति खरीदने से पहले UP RERA की महत्वपूर्ण सलाह

UP RERA ने खरीदारों को सलाह दी है कि खरीदारी से पहले निम्नलिखित बातें अवश्य जाँचें—

  1. भूमि का स्वामित्व (Title)।
  2. स्वीकृत नक्शा एवं लेआउट।
  3. परियोजना का RERA पंजीकरण।
  4. परियोजना का Collection Account।
  5. Quarterly Progress Reports (QPR)।
  6. बिल्डर के विरुद्ध दर्ज शिकायतों की संख्या।

UP RERA की आधिकारिक वेबसाइट:

UP RERA Official Website

यहाँ आप:

  • Project Search
  • Agent Search
  • Complaint Status
  • Orders
  • Circulars
  • Registered Projects
  • Builder Details
  • Quarterly Progress Reports

UP RERA ने समय-समय पर खरीदारों को ऐसे भ्रामक वादों से सावधान रहने की सलाह दी है। कुछ सामान्य गलत कमिटमेंट (Wrong Commitments) इस प्रकार हैं:

  1. Assured Return (गारंटीड रिटर्न) – “हर महीने निश्चित आय मिलेगी।”
  2. Fixed Rental Income – “पजेशन से पहले हर महीने किराया मिलेगा।”
  3. Guaranteed Buyback – “कुछ वर्षों बाद कंपनी आपकी प्रॉपर्टी निश्चित कीमत पर वापस खरीद लेगी।”
  4. Pre-EMI हम भरेंगे – लेकिन यह शर्त कानूनी समझौते में शामिल नहीं होती।
  5. Free Car, Gold Coin, Foreign Trip जैसे आकर्षक ऑफर देकर खरीदने के लिए प्रेरित करना।
  6. मौखिक वादा (Verbal Commitment) – “6 महीने में पजेशन मिल जाएगा”, लेकिन Agreement for Sale में इसका उल्लेख नहीं।
  7. RERA Approval आने वाला है – जबकि परियोजना अभी RERA में पंजीकृत नहीं होती।
  8. 100% Legal Project – बिना सभी स्वीकृतियों के ऐसा दावा करना।
  9. कीमत कल से बढ़ जाएगी या “आज ही बुक करें, आखिरी मौका है” जैसी दबाव वाली मार्केटिंग।
  10. सभी सुविधाएँ (Club, Park, School, Metro) निश्चित रूप से मिलेंगी – जबकि वे स्वीकृत योजना का हिस्सा नहीं होतीं।

UP RERA खरीदारों को क्या सलाह देता है?

  • केवल RERA-Registered Project में निवेश करें।
  • केवल विज्ञापन या मौखिक वादों पर भरोसा न करें।
  • Builder Buyer Agreement / Agreement for Sale को ध्यान से पढ़ें।
  • RERA पोर्टल पर परियोजना का पंजीकरण, स्वीकृत नक्शा, निर्माण प्रगति और अन्य विवरण स्वयं जांचें।
  • सभी भुगतान बैंकिंग माध्यम से करें; नकद भुगतान से बचें।

RERA Complaint का Process: शिकायत कहाँ और कैसे दर्ज करें?

यदि किसी Buyer  खरीदार या निवेशक को अपनी Property (संपत्ति) का समय पर Possession (कब्ज़ा) नहीं मिलता है, या फिर बिल्डर द्वारा गलत या भ्रामक जानकारी दी जाती है,तब उसे प्रोजेक्ट,या बिल्डर /ब्रोकर की शिकायत के लिए रेरा में शिकायत दर्ज करनी होगी। यदि शिकायत कर्ता के अनुसार  RERA Act, 2016 के किसी प्रावधान का उल्लंघन किया जाता है, तो खरीदार UP RERA में ऑनलाइन या ऑफलाइन शिकायत (Complaint) दर्ज कर सकता है।

शिकायत दर्ज करने के लिए खरीदार के पास दो विकल्प उपलब्ध हैं—

  1. Online Complaint: UP RERA की Official Website के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।
  2. Offline Complaint: संबंधित UP RERA Office में आवश्यक दस्तावेजों के साथ लिखित शिकायत प्रस्तुत की जा सकती है।

शिकायत प्राप्त होने के बाद UP RERA Authority दोनों पक्षों को सुनवाई (Hearing) का अवसर प्रदान करती है। मामले के तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्राधिकरण आवश्यक आदेश (Order) पारित करता है। यदि किसी पक्ष को आदेश से असंतोष हो, तो वह अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार Real Estate Appellate Tribunal के समक्ष अपील भी कर सकता है।

उत्तर प्रदेश रेरा (UP RERA) के प्रमुख कार्यालय

वर्तमान में UP RERA के दो प्रमुख कार्यालय (Benches/Offices) कार्यरत हैं—

1. मुख्यालय (Headquarters) – लखनऊ

UP RERA Headquarters

पता: नवीन भवन, राज्य नियोजन संस्थान, कला कंकर हाउस, ओल्ड हैदराबाद, लखनऊ – 226007 | हेल्पलाइन: 9151602229, 9151642229 | कार्यालय समय: सोमवार से शनिवार, प्रातः 10:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक।

2. क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) – ग्रेटर नोएडा

UP RERA Regional Office

पता: H-169, चितवन एस्टेट रोड, गामा-II, ग्रेटर नोएडा – 201308 | हेल्पलाइन: 9151672229, 9151682229, 0120-2326111 | कार्यालय समय: सोमवार से शनिवार, प्रातः 10:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक।

किसी भी निवेशक या उपभोक्ता को शिकायत दर्ज करने से पहले परियोजना(प्रोजेक्ट) का RERA Registration Number, और अन्य संबंधित दस्तावेज, भुगतान रसीदें, बिल्डर के साथ किया गया Agreement for Sale तथा अन्य आवश्यक साक्ष्य अपने पास सुरक्षित रखने हैं।क्योंकि इससे शिकायत कर्ता को शिकायत के लिए त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण में सहायता मिल सकती है।

Real Estate Disputes: RERA से पहले और RERA के बाद

जब से भारत में रेरा (RERA) लागू हुआ है, तब से रियल एस्टेट क्षेत्र से संबंधित शिकायतों और विवादों का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध होने लगा है। RERA के माध्यम से घर खरीदारों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने तथा उनका त्वरित समाधान प्राप्त करने का प्रभावी मंच मिला है। हालांकि, वर्ष 2016 से पहले भी रियल एस्टेट क्षेत्र में परियोजनाओं में देरी, झूठे वादे, धन की हानि तथा अन्य अनेक विवाद सामने आते थे, लेकिन उस समय उनके निस्तारण के लिए RERA जैसा एकीकृत नियामक तंत्र उपलब्ध नहीं था। परिणामस्वरूप, ऐसे कई मामले विभिन्न उपभोक्ता मंचों, न्यायालयों या अन्य प्राधिकरणों में लंबे समय तक लंबित रहे या सार्वजनिक रूप से व्यापक रूप से सामने नहीं आ सके। RERA लागू होने के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और खरीदारों के अधिकारों की सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाया गया है।

1. UP RERA की official वेबसाइट पर रेरा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी गयी हैं।  

RERA

रेरा से सम्बंधित cases का अधिकतम ब्यौरा भी rera की official website पर उपलब्ध है। 
UP RERA Official Website
2. UP RERA Annual Reports
UP RERA Annual Reports
3. UP RERA की 100वीं बैठक की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति
(इसमें शिकायतों के निस्तारण, आदेशों के अनुपालन, Recovery Certificates आदि का विस्तृत विवरण उपलब्ध है।)
UP RERA 100th Meeting Press Release (PDF)
वर्तमान में उपलब्ध आधिकारिक एवं सार्वजनिक स्रोतों के आंकड़ों के अनुसार लगभग 60,000+ शिकायतें (Complaints) दर्ज की जा चुकी हैं। और 53,000+ मामलों का निस्तारण (Disposed Cases) किया जा चुका है। ये आंकड़े कम या ज्यादा हो सकते हैं परन्तु ये सत्य है कि इन आंकड़ों में लगातार बढोत्तरी होती जा रही है। 

Disclaimer

यहाँ प्रस्तुत RERA से संबंधित जानकारी आधिकारिक RERA वेबसाइटों, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी स्रोतों तथा व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर संकलित की गई है। पाठकों की सुविधा के लिए RERA से संबंधित महत्वपूर्ण लिंक, प्रक्रियाएँ एवं संदर्भ भी शामिल किए गए हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर आधिकारिक स्रोतों से जानकारी का सत्यापन किया जा सके।

यद्यपि यहाँ दी गई जानकारी को यथासंभव सटीक एवं अद्यतन रखने का प्रयास किया गया है, फिर भी समय-समय पर कानूनों, नियमों, अधिसूचनाओं, नीतियों एवं प्रक्रियाओं में परिवर्तन हो सकते हैं। इसलिए किसी भी कानूनी, वित्तीय, निवेश अथवा संपत्ति से संबंधित निर्णय लेने से पूर्व संबंधित राज्य के आधिकारिक RERA पोर्टल अथवा योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

यह जानकारी केवल RERA के बारे में सामान्य जागरूकता एवं शैक्षिक उद्देश्य से प्रदान की गई है। लेखक, संकलनकर्ता अथवा Adoration Realtors यहाँ दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हानि, वित्तीय नुकसान अथवा कानूनी विवाद के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।

“RERA नियमों की अधिक जानकारी के लिए आप विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। इसके साथ ही, यदि आप किसी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट या प्रॉपर्टी के स्टेटस के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो Adoration Realtors के CEO श्री नवनीत श्रीवास्तव जी से संपर्क कर उचित सलाह व परामर्श ले सकते हैं।”

ईमेल: contact@adorationrealtors.com
संपर्क नंबर: +91 8800241368

निष्कर्ष (Conclusion)

रेरा (RERA) भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कानून है। यह न केवल घर खरीदारों के गाढ़े पसीने की कमाई को सुरक्षित करता है और उन्हें बिल्डरों की मनमानी से बचाता है, बल्कि डेवलपर्स को भी एक स्पष्ट और नियम-आधारित ढांचा प्रदान करता है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों द्वारा इसके नियमों को कड़ाई से लागू करने से यह स्पष्ट होता है कि इसका उद्देश्य विवादों का त्वरित समाधान करना और बाजार में निवेशकों का भरोसा दोबारा कायम करना है।

अतः, किसी भी अचल संपत्ति (जैसे- घर, फ्लैट या प्लॉट) में निवेश करने से पहले खरीदारों को परियोजना की पूरी जानकारी के साथ-साथ रेरा अधिनियम और उसके पंजीकरण नंबर की जांच अवश्य करनी चाहिए, ताकि वे एक सुरक्षित, पारदर्शी और जोखिम-मुक्त निवेश का निर्णय ले सकें।

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