Real Estate में Possession (कब्जा) का अर्थ और इसके मुख्य प्रकार I प्रॉपर्टी का कब्जा (Possession) लेते समय ध्यान रखने योग्य जरूरी नियम

रियल एस्टेट में प्रॉपर्टी खरीदना सब्जी खरीदने जैसा आसान नहीं होता, जहाँ आपने पैसे दिए और तुरंत सामान हाथ में आ गया। जमीन या मकान खरीदते समय हमारा पैसा तो तुरंत चला जाता है, लेकिन प्रॉपर्टी का ‘पजेशन’ (Possession) यानी कब्जा मिलने में अक्सर महीनों या सालों लग जाते हैं। कई बार तो NH-24 स्थित अंतरिक्ष प्रोजेक्ट जैसी स्थिति बन जाती है, जहाँ बिल्डिंग ढांचा बनकर तैयार खड़ी रहती है पर लोगों को सालों-साल कब्जा ही नहीं मिलता। इसलिए केवल हाथ में कागजात होना असली कब्जा नहीं है; असली पजेशन का मतलब है कि उस प्रॉपर्टी पर आपका पूरा कंट्रोल हो, आप उसमें रह सकें, अपना बिजनेस चला सकें या उसे किराए पर देकर लाभ उठा सकें।

अलग-अलग तरह की प्रॉपर्टी में पजेशन का नियम भी अलग होता है। एग्रीकल्चर लैंड (खेती की जमीन) या रेजिडेंशियल प्लॉट्स में रजिस्ट्री कराकर और म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) करवाकर आपको लगभग तुरंत कब्जा मिल जाता है। फ्लैट्स के मामले में अगर आप ‘रेडी टू मूव’ (Ready to Move) फ्लैट ले रहे हैं, तो पूरा पेमेंट करते ही पजेशन मिल जाता है। लेकिन ‘अंडर कंस्ट्रक्शन’ (Under-construction) प्रोजेक्ट्स में पजेशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसमें बिल्डर के साथ ‘कंस्ट्रक्शन लिंक्ड प्लान’ (Construction Linked Plan) होता है, जिसमें 30%, 50%, 70% निर्माण कार्य पूरा होने पर किस्तों में पेमेंट दी जाती है और फाइनल 100% पेमेंट प्रोजेक्ट की डिलीवरी और पजेशन के समय होती है।

रियल एस्टेट में पजेशन मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है:

  1. फिजिकल पजेशन (Physical Possession): यह सबसे असली और व्यावहारिक कब्जा है, जिसमें आपको घर की चाबियाँ, बिजली-पानी का लीगल कनेक्शन और चाबी लगाकर रहने का पूरा अधिकार मिलता है।
  2. सिम्बॉलिक पजेशन (Symbolic Possession): यह केवल एक कागजी या सांकेतिक अधिकार होता है (जैसे लोन डिफॉल्ट होने पर बैंक का सांकेतिक कब्जा या केवल पजेशन लेटर जारी होना), जहाँ कागजों पर नाम आ जाता है लेकिन भौतिक रूप से नियंत्रण मिलना बाकी रहता है।
  3. फिट-आउट पजेशन (Fit-out Possession): इसमें बिल्डर आपको सिर्फ घर का इंटीरियर, वुडवर्क या फर्नीचर का काम करवाने की इजाजत देता है, लेकिन आप कानूनी रूप से वहाँ स्थायी तौर पर शिफ्ट नहीं हो सकते।

कानूनी रूप से पजेशन लेते समय हमेशा ध्यान रखें कि जब तक बिल्डर से ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (CC) न मिल जाए, तब तक कब्जा स्वीकार न करें। बिना OC/CC के किसी भी बिल्डिंग में रहना गैर-कानूनी होता है। फाइनल पजेशन लेटर पर साइन करने से पहले पूरे फ्लैट की ‘स्नैगिंग’ (Snagging Check) करें, यानी प्लंबिंग, वायरिंग, टाइल्स और लीकेज की जांच करके बिल्डर से कमियाँ ठीक करवाएं। इसके बाद सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में ‘सेल डीड’ (Sale Deed) की रजिस्ट्री कराएं।

यदि कोई बिल्डर तय एग्रीमेंट के अनुसार समय पर पजेशन देने में असफल रहता है, तो RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) की धारा 18 के तहत आपको पूरा legal right है कि आप ब्याज सहित अपना 100% पैसा वापस मांग लें या फिर प्रोजेक्ट में बने रहकर देरी की पूरी अवधि के लिए हर महीने ब्याज (Compensation) वसूलें।

Disclaimer

Adoration द्वारा दी गई सभी जानकारियां, सामग्री और परामर्श केवल शिक्षा (Education), अभ्यास (Practice) और मार्गदर्शन (Guidance) के उद्देश्य से हैं। इसे किसी भी प्रकार की आधिकारिक, कानूनी या वित्तीय सलाह न माना जाए। किसी भी निर्णय या वित्तीय लेन-देन से पहले अपने स्तर पर जांच (Due Diligence) और विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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